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बलात्कार के नये कानून पर विचारधारा

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मानव इतिहास पर अगर एक बार नजर डाली जाए तो हम जानेंगे कि स्त्रियों पर हमेशा ही अत्याचार ज्यादा हुए हैं। प्राचीन काल से ही स्त्रियों का शोषण होता रहा है। समय बदला, नई सभ्यताओं का उदय हुआ मगर स्त्रियों कि स्थिति और भी शोचनीय हो गई। ये कैसी विडम्बना है कि पुरुष जो स्त्री का पुत्र, पति या पिता होता है वही स्त्री को सबसे ज्यादा कष्ट पहुंचाता है। मगर कब तक कोई अत्याचार सहे? कोई कब तक चुप रहे? कोई कब तक कष्ट सहे? इन्हीं अत्याचारों में से एक बलात्कार है। बलात्कार नवीन समाज में एक कभी ना भरने वाला घाव है जो अनंत समय तक कष्टदायक होता है। बलात्कार एक ऐसा कृत्य है जो ना केवल स्त्री की मर्यादा भंग करता है बल्कि उसके जीवन को एक बोझ बना देता है।

क्यों बलात्कार का कानून बदला गया?

पिछली कुछ सालों से भारत में बलात्कार के कई मामलें देखने को मिले हैं। कुछ घटनाओं ने तो मानवता से विश्वास तक उठवा दिया। हम उन घटनाओं को यहां पर बता कर आपको दुखी नहीं करना चाहते। लेकिन यह मामले निरंतर बढते ही जा रहे हैं। प्रशासन इनपर रोक लगाने में असफल सा नजर आता है। बलात्कार का शिकार हर उम्र की स्त्री होती है। 6 महीने से लेकर 90 साल तक की कोई भी औरत सुरक्षित नहीं है। हाल ही में कठुआ बलात्कार मामले ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया। पूरा देश दुख के गहरे सागर में डूब गया। पूरे देश ने सरकार से गुहार लगाई कि वह कुछ करे। अब लोग सहना नहीं चाहते। अब और बलात्कार नहीं चाहते। इसलिए बलात्कार के कानून में बदलाव किया गया।

क्या है बलात्कार का नया कानून?

देश अब बलात्कारियों को और बर्दाश्त नहीं कर सकता। देश का प्रत्येक नागरिक अपनी मां, अपनी बहन, अपनी बीवी और अपनी बेटी को सुरक्षित माहौल देना चाहता है। वह हर उस व्यक्ति से छुट्कारा पाना चाहता है जो स्त्रियों की इज्जत पर हाथ डालता है। वह बेहतर समाज के निर्माण की सरकार से गुहार लगाता है। इसी बदलते वक्त के साथ भारत के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद ने बलात्कार के कठोर कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। जिसके चलते
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), साक्ष्य अधिनियम, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पीओसीएसओ) अधिनियम में अब संशोधन किया जाएगा।

कानून क्या कहता है?

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यह कानून बलात्कार के अपराधियों के लिए कड़ी सजा को निर्धारित करता है, खासकर 16 और 12 साल से कम उम्र की लड़कियों की। 12 साल से कम उम्र के लड़कियों के बलात्कारियों के लिए मौत की सजा तक निर्धारित की गई है। महिलाओं के बलात्कार के मामले में न्यूनतम सजा सात साल से 10 साल तक कारावास तक कर दी है, जो आजीवन कारावास के लिए विस्तार योग्य है। 16 साल से कम उम्र की लड़की के बलात्कार के मामले में, न्यूनतम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है, जो शेष जीवन के लिए कारावास के लिए विस्तारित है।16 साल से कम उम्र की लड़की के गैंगरेप की सजा हमेशा अपराधी के बाकी जीवन के लिए कारावास करदी है। 12 साल से कम उम्र की लड़की के बलात्कार के लिए सजा के तौर पर न्यूनतम जेल की अवधि 20 की गई है जो आजीवन कारावास से मौत की सजा तक जा सकती है |

क्या हम इसके पक्ष में हैं?

जी हां, हम और सारा सभ्य समाज यही चाहता है कि स्त्रियॉ सुरक्षित रहें। बलात्कार के अपराधियों को क्षमा नहीं किया जा सकता। उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। हमारी तरफ से बस इतना ही।

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