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रक्षाबंधन का त्यौहार

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Raksha Bandhan, Rakhi ka Tyohar

भारतीय धर्म अनुसार भाई बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता है | हिंदू धर्म में भाई बहन के त्योहारों में सर्वोच्च रक्षाबंधन का त्यौहार कहा जाता है | यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है | अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रक्षाबंधन का त्यौहार आमतौर पर अगस्त के महीने में आता है |

रक्षाबंधन का धार्मिक इतिहास

क्या आपने कभी सोचा है कि रक्षाबंधन के पीछे कौन सी धार्मिक अथवा पौराणिक कथा है? तो चलिए, आज हम आपको कुछ चुनिंदा प्रख्यात कथाओं के बारे में बताएंगे –

कृष्ण द्रौपदी कथा

यह बात है महाभारत काल की | एक दिन भगवान श्री कृष्ण की कनिष्ठिका उंगली में चोट लग जाती है और खून बहने लगता है | वहीं से द्रोपदी गुजर रही होती है और वह तुरंत ही अपनी साड़ी के पल्लू से थोड़ा कपड़ा फाड़ कर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में बांध देती है | यहीं से श्री कृष्ण भगवान और पांचों पांडवों की धर्मपत्नी द्रोपदी के दरमियान एक पवित्र रिश्ते का गठन होता है | और जब कौरव द्रोपदी का चीर हरण कर रहे होते हैं तो वह श्री कृष्ण को याद करती है | इसके पश्चात श्री कृष्ण द्रौपदी की साड़ी को कभी ना खत्म होने वाली साड़ी बना देते हैं | द्रोपदी की रक्षा कर श्री कृष्ण एक भाई होने का फर्ज निभाते हैं | वहीं से इस भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का गठन होता है |

यम और यमुना

रक्षाबंधन से जुड़ी एक और पौराणिक कथा है | यह कहानी है मृत्यु के देवता यम और उत्तर भारत में बहने वाली नदी यमुना की | इस कहानी के अनुसार यमुना, यम को राखी बांधती है | इसके बदले में मृत्यु देवता यम उसे अमरता का वरदान देते हैं | और इसी के साथ कहते हैं कि कोई भी पुरुष अगर किसी महिला अथवा कन्या से राखी बंधवाता है तो यह उसका फर्ज़ बनता है कि वह उस महिला अथवा कन्या की आजीवन रक्षा करे |

इसके अलावा संतोषी माता और श्री गणेश, माता लक्ष्मी और राजा बलि, इंद्रा देव की कथाएं हिंदू धर्म में बहुत प्रचलित है |

Raksha Bandhan ka Tyohaar

आधुनिक समय में रक्षा बंधन

आज भी हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन का त्यौहार उसी हर्षोल्लाष और मह्तवपूर्णता से मनाया जाता है | पौराणिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंदन के त्यौहार के दिन भाई अपनी बहन के घर राखी बंधवाने जाता है परन्तु आजकल ऐसा नहीं है, आजकल शादी के बाद औरत अपने भाइयों को राखी बांधने मायके जाती है | हालांकि दूर दराज़ रह रहे भाई भी अपने बहनों से राखी बंधवाने अपनी बहनों के घर जाते हैं |

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अगर किसी की बहन नहीं है तो वह किसी भी कन्या या महिला को अपनी बहन बना सकता है और उससे राखी बंधवा सकता है | और आज के समय में ऐसा होता भी है | जिनकी कोई बहन नहीं होती वह आसपड़ोस में या घर परिवार में किसी कन्या को अपनी बहन का दर्जा देते हैं और सभी फ़र्ज़ निभाते हैं |

रक्षाबंधन वाले दिन बहन अपने भाई के लिए नयी नयी तरह की राखियां लाती  हैं और उसके लिए फल, मिठाइयां भी लाती हैं | भाई भी अपनी बहनों को खुश करने के लिए भेंट में उन्हें दक्षणा और कपडे आदि देते हैं | रक्षाबंदन के दिन सभी घरों में ख़ुशी का माहौल रहता है |

सरकार भी रक्षाबंधन वाले दिन महिलाओं अथवा कन्याओं के लिए मुफ्त बस और रेल सफर प्रदान करती है |

सभी पुरुषों से यह हमारा निवेदन की हर महिला हर कन्या की इज़्ज़त करें | वह भी किसी की बहन, किसी की माँ, किसी की बेटी, किसी की पत्नी है |

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