Home महान विभूतियाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

2 second read
0
0
343
netaji subhash chandra bose

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” यह नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में एक हैं | आजाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक नेताजी ने कई साहसिक कार्य किए थे, जर्मनी और जापान की सहायता से उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था |

सुभाष चंद्र बोस का जन्म और पढ़ाई

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक (उड़ीसा) में हुआ था | वह अपने माता पिता की 9वी संतान थे | सुभाष की माता का नाम था प्रभावती और पिता का नाम था जानकीनाथ | कटक में ही एक विद्यालय में सुभाष ने अपने शुरुआती पढ़ाई पूरी की अथवा कोलकाता यूनिवर्सिटी से अपनी मैट्रिक की परीक्षा सेकंड डिवीजन से पास की |

सन 1919 में फर्स्ट डिवीजन से सुभाष चंद्र बोस ने स्नातक की डिग्री फिलॉस्फी में प्राप्त की | इसके बाद ही इसी साल सुभाष के पिता ने उन्हें इंग्लैंड भेज दिया ताकि वह इंडियन सिविल सर्विस की नौकरी पा सके | इंडियन सिविल सर्विस की नौकरी पाकर सुभाष खुश ना थे और सन् 1921 में उन्होंने इस्तीफा देकर भारत का रुख किया |

सुभाष चंद्र बोस और कांग्रेस

इंडियन सिविल सर्विस से इस्तीफा देने के बाद सुभाष चंद्र बोस जुलाई 1921 में मुंबई पहुंचे | वहां पर उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई | अपने इस राजनीति के शुरुआती सालों में सुभाष चंद्र बोस, चितरंजन दास को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और उन्होंने उनके साथ काफी वक्त तक काम किया |

सुभाष चंद्र बोस को नौजवान बेहद पसंद करते थे और वह भी नौजवानों को जागरुक करने में व्यस्त रहते थे | सन 1926-27 में सुभाष चंद्र बोस पहली मर्तबा जेल गए | इससे उनका रुतबा और बढ़ा और वह सन 1930 में कोलकाता प्रांत के मेयर भी बने |

सुभाष चंद्र बोस गर्म खून से देश को पूर्ण रूप से आजादी दिलाना चाहते थे वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा से आजादी पाना चाहते थे | दोनों के विचारों में बेहद फर्क आने लगा था | आजादी के लिए बनी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस के एक आम चुनाव में सुभाष चंद्र बोस को नेता चुना गया था परंतु वह महात्मा गांधी को नीचा नहीं दिखाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने वहां से इस्तीफा दे दिया |

subhash chandra bose

आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस ने एक जन आंदोलन करने की सोची | इसकी खबर पाते ही अंग्रेजी सरकार ने सुभाष चंद्र बोस को जेल में डाल दिया, जहां सुभाष चंद्र बोस ने दो हफ्तों तक खाना खाने से इंकार कर दिया, जिसके चलते उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई, और उन्हें तुरंत ही अस्पताल भेजा गया | वहां से सुभाष चंद्र बोस भाग निकले | कुछ लोगों की मदद लेकर सुभाष चंद्र बोस जर्मनी चले गए जहां पर वह हिटलर से मिले, वहां पर करीब 3 साल तक रहे | उसके बाद अफगानिस्तान, रशिया, जापान कई देशों से होते हुए सुभाष चंद्र बोस ने कुछ लोगों को इकट्ठा किया जो एक बड़ी फौज बनाने में सुभाष चंद्र बोस का साथ दे सकते थे |

21 अक्टूबर 1945 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की जिसमें 40000 से भी अधिक सैनिक शामिल थे जिनको सिंगापुर और अन्य पूर्वी इलाकों से आजाद किया गया था | नेताजी ने रासबिहारी बोस के साथ मिलकर अलग-अलग रेजीमेंट बनाई जिसमें महिलाएं भी शामिल थी | एक वक्त पर आजाद हिंद फौज में करीब 85000 सैनिक शामिल थे |

सुभाष चंद्र बोस के शब्द

जुलाई 1944 में बर्मा में सुभाष चंद्र बोस ने यह नारा दिया, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” | यह नारा हिंद फौज में जोश भरने के लिए दिया गया था |

जुलाई 1944 में सुभाष चंद्र बोस ने एक वीडियो के जरिए महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता’ की उपाधि दी थी |

सुभाष चंद्र बोस का निजी जीवन

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 40 साल की उम्र में सन 1937 में एमिली नामक एक महिला से शादी की थी  | 29 नवंबर 1942, वियना, एमिली शेंकल और नेताजी बोस को एक लड़की हुई जिसका नाम अनीता बोस है और वह आज भी जिंदा है |

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु पर सवाल आज तक बना हुआ है | कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हो गई थी, परंतु इस बात में कितनी सच्चाई है यह हम नहीं जानते | हाल ही में भाजपा सरकार में नरेंद्र मोदी ने सुभाष चंद्र बोस की कुछ फाइल जारी की थी, परंतु उनसे भी यह साफ नहीं हुआ कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कब हुई थी | कुछ लोगों ने सुभाष चंद्र बोस को उनकी कथित मौत के बाद भी देखे जाने की बात की है | उनकी बेटी ने भी सरकार से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि उनके पिता की मृत्यु पर कोई भी फॉरेंसिक जांच नहीं की गई |

 

Load More Related Articles
  • ground water level

    घटता भूजल स्तर

    जल ही जीवन है और इसके  बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना  भी नहीं की जा सकती, परन्तु हम लोगों …
  • kanvar, kanvad

    कांवड़ यात्रा

    प्रत्येक वर्ष सावन के महीने मे कांवड़ यात्रा प्रारम्भ होती है , भगवान शिव से अपना मनवांछित …
  • Maharana Pratap

    महाराणा प्रताप

    मेवाड़ के राजा, महाराणा प्रताप अपने समय एक मात्र ऐसे स्वाभिमानी शासक थे, जिन्होंने देश की स…
Load More By RPS
  • Maharana Pratap

    महाराणा प्रताप

    मेवाड़ के राजा, महाराणा प्रताप अपने समय एक मात्र ऐसे स्वाभिमानी शासक थे, जिन्होंने देश की स…
  • gurudev rabindranath tagore

    गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर

    नोबेल पुरुष्कार प्राप्त कवि रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी प्रतिभा से साहित्य, सिक्षा, संगीत, क…
  • sardar vallabh bhai patel

    लौह पुरुष – सरदार वल्लभभाई पटेल

    लौह पुरुष के नाम से प्रख्यात भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत के प…
Load More In महान विभूतियाँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

घटता भूजल स्तर

जल ही जीवन है और इसके  बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना  भी नहीं की जा सकती, परन्तु हम लोगों …