Mahatma Gandhi

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bapu, gandhi ji

राष्ट्रपिता  महात्मा गाँधी एक आदर्श

महात्मा गाँधी इस दुनिया में पैदा हुए महापुरुषों की सूची में शीर्ष पर आते हैं | उन्होंने इस दुनिया के लिए कई संदेश छोड़े जो आज भी अस्तित्व रखते हैं | उन्होंने यह साबित किया कि अहिंसा के जरिए भी आजादी ली जा सकती है | वह आज भी लोगों के दिलों दिमाग में जिंदा है |

गाँधी जी का जन्म :

महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को एक छोटे से शहर पोरबंदर में हुआ | उनका पूरा नाम “मोहनदास करमचंद गाँधी” था | उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी तथा उनकी माता का नाम पुतलीबाई था |

गाँधी जी का विवाह :

बाल अवस्था में ही महात्मा गाँधी का विवाह कस्तूरबा से हो गया था | विवाह के वक्त मोहनदास और कस्तूरबा दोनों ही 13-13 साल के थे |

गाँधी जी की शिक्षा  :

सन 1885 में जब मोहनदास 16 साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया था | अपने शुरुआती पढ़ाई खत्म करने के बाद 1888 मोहनदास वकालत करने के लिए इंग्लैंड चले गए | 1891 मैं मोहनदास अपनी वकालत खत्म कर वापस भारत लौटे |

दक्षिण अफ्रीका मे गाँधी जी का योगदान :

बॉम्बे (अब मुंबई) आकर उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माता जी का निधन हो चुका है | उसके बाद उन्होंने अपने बच्चों और अपने भाई के बच्चों की पढ़ाई की देखरेख की | कुछ महीने बॉम्बे और राजकोट में रहकर उन्होंने अपना समय व्यतीत किया परंतु वाह  स्थापित ना हो पाए | और फिर अप्रैल 1893 में वह दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की ओर रवाना हो गए | 24 वर्षीय गाँधी को अब्दुल्ला सेठ ने डरबन में रिसीव किया | दक्षिण अफ्रीका में बहुत सारे भारतीय बसे हुए थे |

दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भेदभाव की स्थिति देखी | एक बार गाँधी ने फर्स्ट क्लास की टिकट ली, परंतु जब वह रेल गाड़ी में बैठने गए तो अश्वेत होने के कारण उन्हें थर्ड क्लास में जाने के लिए कहा गया | परंतु गाँधी ने मना कर दिया जिसके चलते पुलिस वालों ने उन्हें धक्का देकर ट्रेन से बाहर निकाल दिया | एक बार तो उन्हें रेल कंडक्टर ने बहुत पीटा |

दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत लोगों की ऐसी हालत देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ और इसी के चलते उन्होंने एक सभा प्रिटोरिया शहर, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित की | वहीं पर महात्मा गाँधी ने अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया था | कुछ सालों बाद महात्मा गाँधी अपने परिवार को भी दक्षिण अफ़्रीका ले आए | बाद में उन्हें जोहानेसबर्ग शहर के न्यायालय में वकील का काम मिल गया था, हालांकि वह भारत आते रहते थे |

भारत के स्वतंत्रता संग्राम मे गाँधी जी का अहम् योगदान :

जनवरी 1915 में महात्मा गाँधी भारत लौटे और साबरमती नदी के किनारे अहमदाबाद शहर में बस गए | मई 1915 में उन्होंने सत्याग्रह आश्रम स्थापित किया |  महात्मा गाँधी अब भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने लगे थे |

महात्मा गाँधी के आंदोलन अब पूरे भारत में चर्चित होने लगे थे | अंग्रेजी हुकूमत ने महात्मा गाँधी के इस रवैय और अंग्रेजी शासकों के खिलाफ चलने के कारण उन्हें पहली बार पलवल शहर से गिरफ्तार किया जहां से उन्हें मुंबई भेज दिया गया |

नवंबर 1919 में मुस्लिम कांफ्रेंस के दौरान महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन अंग्रेजी सरकार के खिलाफ शुरू किया | 1922 में चौरी चौरा घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत सरकार ने महात्मा गाँधी को 6 साल गैर-जमानती कारावास की सजा सुना दी | परंतु 1924 में बहुत अधिक बीमार होने के कारण अंग्रेजी सरकार ने उनकी सजा माफ कर दी |

अगले कुछ साल महात्मा गाँधी ने देश जनहित के बारे में सोचा और अछूत, एकता, महिलाओं के लिए समानता जैसे मुद्दों पर अपने भाव प्रकट किए और देश में जागरूकता फैलाई | 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का नारा लहराया गया और कई बड़े नेताओं ने उनका समर्थन किया |

Gandhi ji salt march statue

महात्मा गाँधी हिंसा में विश्वास नहीं रखते थे, अहिंसावादी इंसान थे और वह इसी के जरिए देश को आजादी दिलाना चाहते थे | कांग्रेस भी अब दो गुटों में बट चुकी थी, एक गुट वह था जिसमें सुभाष चंद्र बोस ने अहम भूमिका निभाई और वह अंग्रेजों से लड़कर आजादी पाना चाहते थे दूसरी ओर महात्मा गाँधी स्वयं थे जो अहिंसा के जरिए आज़ादी खोज रहे थे |

कुछ महीने बीमार रहने के बाद महात्मा गाँधी की पत्नी कस्तूरबा गाँधी फरवरी 1944 को चल बसी | इसके बाद महात्मा गाँधी भी बीमार पड़ गए थे, उनकी गैरमौजूदगी में हिंदू और मुसलमानों के बीच दंगे बढ़ने लगे थे | वह देश को एकजुट करना चाहते थे जिसके चलते वह मुसलमानों की मांगों को पूरा करने लगे | और वह मांगे इतना बढ़ गई कि मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुसलमान एक अलग देश की मांग करने लगे |

मई 1947 को महात्मा गाँधी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के आवेदन पर दिल्ली पहुंचे जहां पर ब्रिटिश सरकार ने भारत को दो भागों में बांटने का प्रस्ताव मान लिया | महात्मा गाँधी अंत तक भारत को बांटने के खिलाफ थे परंतु व अन्य कांग्रेस नेताओं को ना मना सके |

अपने अंतिम दिनों में महात्मा गाँधी ने कई मुद्दों पर भाषण दिए | उन्होंने धर्म जाति से हटकर जनहित के बारे में लोगों को जागरुक किया | साथ ही उन्होंने पुलिस सुरक्षा लेने से भी इनकार कर दिया था |

गाँधी जी की मृत्यु :

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी को तीन गोलियां मार दी | गाँधी जमीन पर गिर पड़े और उन्होंने अपने लड़खड़ाते हुए शब्दों में ” हे राम” कहां | और बस उनकी धड़कन थम गई और वह चल बसे |

राष्ट्रपिता, बापू, महात्मा जैसे अनेक ख़िताब पा चुके मोहनदास करमचंद गाँधी आज भी हम सबके दिलों में जिंदा हैं |

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