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कैराना में इन वजहों से हुई बीजेपी की हार

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kairana by election 2018

ऐसा लगता है जैसे उपचुनावों में भाजपा के लिए कोई ग्रहण लग जाता है| देश में जितने भी उपचुनाव पिछले दिनों हुए है उनमे सभी में बीजेपी को हार नसीब हुई| कैराना के चुनावों में हुई हार की बाते सबकी जुबान पर है और कोई जानना चाहता है की इसकी वजह क्या है, आइये जानते है-

  • कमजोर प्रत्याशी

सबसे पहली बात बीजेपी के पास कोई मजबूत प्रत्याशी कैराना में नहीं था| बीजेपी की उम्मीदवार मृगांका सिंह थी जो बीजेपी के  सांसद हुकुम सिंह की बेटी है और हुकुम सिंह की मृत्यु  के बाद ही यहाँ चुनाव हुए है | पिछले यूपी विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय लोक दल की विजयी उम्मीदवार तबस्सुम  हसन के बेटे से मृगान्का सिंह हार गई थी और इस बार माँ से हार गई| गौर करे तो कैराना जैसे महत्वपूर्ण चुनावों में मृगान्का सिंह जैसी कमजोर उम्मीदवार उतराना ही हार की वजह रही|

  • गन्ना

कुछ दिन पहले सांसद मेनका गाँधी का एक बयान आया था| जिसमे वो किसानो से कह रही थी की गन्ना मत उगाओ देश को कोई जरूरत नहीं है| जबकि पश्चिमी यूपी में सबसे अधिक गन्ने की खेती होती है और लंबे समय से चीनी मिल के मालिको ने किसानो के गन्ने का भुगतान नहीं किया था| ऐसे में कही ना कही किसानो में भारी रोष व्याप्त था और गन्ना किसानो ने इसका बदला चुनावों में ले लिया

  • गठबंधन

यूपी के कैराना सीट में सपा बसपा और रालोद का गठबंधन जीता| इससे पहले गोरखपुर सीट में भी गठबंधन से विजय हुई| अब गौर करने वाली बात है की अगर गठबन्धन हो जाता है तो बीजेपी हार जाती है| सभी क्षेत्रीय पार्टियों का विपक्ष के साथ आ जाना और उनका मिल जाना बीजेपी के लिए हार का एक मुख्य कारण बना|

  • ध्रुवीकरण का दाँव नहीं चला-

बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने कैराना में हिन्दुओ के पलायन का मुद्दा बहुत तेजी से उठाया था जिसके चलते बीजेपी को यूपी के विधानसभा चुनावों में फायदा मिला| लेकिन इस बार ये तरकीब काम नहीं आई| दरअसल विपक्ष के किसी बड़े नेता ने कोई बड़ी रैली नहीं की और ना ही हिन्दू मुस्लिम को लेकर कोई विवादित बयान दिया|

  • लगातार हो रही हार

कही ना कही उपचुनावों में बीजेपी की लगातार हो रही हार की वजह से कैराना में बीजेपी की हार हुई| पिछले लोकसभा चुनावों के बाद से ही बीजेपी का उप चुनाव  में लगातार हार जारी है और ऐसे में कही न कही जनता को बीजेपी से दूरी बना लेने का मन है|

आगामी चुनावों में असर- इसका सीधा असर आगामी चुनावों में पड़ेगा क्योकि कही ना कही विपक्ष को ये समझ आ गया है की एक हो जाने से मोदी को रोका जा सकता है| ऐसे में अगर गठबंधन वाला फार्मूला अगले लोकसभा चुनावों में अपनाया गया तो बीजेपी को बहुत मुश्किल हो सकती है|

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