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छुट्टियों में बच्चो को होमवर्क देना कितना सही

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वर्तमान शिक्षा पद्दति में एक होड़ मची हुई है| बच्चे पढने और सीखने के साथ साथ खुद को इस रेस में सबसे आगे साबित करने में लगे हुए है| स्कूल के बस्ते में बोझ बढ़ने के साथ उनके दिमाग में भी पढाई का एक बोझ भर दिया गया है| इसके लिए उन्हें स्कूल में जमकर मेहनत करवाने के साथ साथ होमवर्क दिया जाता है| कई बार गर्मियों की छुट्टियों या बाकी छुट्टियों में बच्चो को होमवर्क दे दिया जाता है और ऐसे में किसी ने ये नहीं सोचा की ये कितना सही है क्योकि पेरेंट्स भी इसे सही मानते है| आइये जानते है-

यह एक तरीके से गलत-

छुट्टियों में बच्चो को होमवर्क देना कही ना कही बहुत गलत है| आप खुद सोचे की छुट्टियाँ होती किसलिए है, इसीलिए ना की हम अपने दिमाग को रोजमर्रा के काम से हटाकर रिलैक्स कर सके| लेकिन बच्चो को गर्मियों में और बाकी छुट्टियों में होमवर्क मिल जाने से वो रिलैक्स नहीं हो पाते| हर चीज की एक सीमा होती है और अगर उससे अधिक काम किया जाय तो वह गलत हो जाती है| ऐसे में आप बच्चो को होमवर्क देते है तो उन्हें बाकी चीजो के बारे में सोचने का मौका नहीं मिलता है|

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इसके नुकसान-

  • क्रिएटिविटी कम होती है-

आप ये समझ ले की किताबे ही सबकुछ नहीं है क्योकि दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो किताब ना पढने के वावजूद आज मिशाल बने हुए है| जब बच्चो को उस समय भी होमवर्क दे दिया जाता है जब वो रिलैक्स होकर खुद के मन का कुछ करना चाहते है तो ऐसे में उनके अंदर छुपी हुई क्रिएटिविटी बाहर नहीं आ पाती है|

  • पढाई बोझ बन जाती है

पढाई में कोई बच्चा तभी सफल हो सकता है जब वो उसे एन्जॉय करे| लेकिन जब बच्चो को छुट्टियों में होमवर्क दे दिया जाता है तो वो पढाई को एन्जॉय नहीं कर पाता बल्कि ये काम उसके लिए बोझ बन जाता है| वो घरवालो की नजरो में तो पढ़ रहा होता है लेकिन खुद अंदर ही अंदर वो पढाई छोड़ देने का विचार मन में पाल चुका होता है|

  • बचपन छिन जाता है

आज के समय में किताबो का बोझ और होमवर्क का प्रेसर ही बचपन है जबकि इसकी परिभाषा ये है ही नहीं| बच्चो को जरूरत से ज्यादा छुट्टियों में होमवर्क देने से उनका बचपन छिन जाता है| बच्चे का बचपन छिन जाने से वो एक अच्छा नौकर तो बन सकता है लेकिन वो एक अच्छा इंसान नहीं बन पाता है|

  • समाज से कटाव

छुट्टियों का समय वो होता है जब एक बच्चा फ्री होता है और वो अपने घरवालो के अलावा रिश्तेदारों और समाज से जुड़ता है लेकिन आज के समय में ऐसा देखने को नहीं मिलता है| होमवर्क मिलने से वो छुट्टियों का समय भी उसी में देने लगता है जिससे वो समाज से बहुत कटने लग जाता है और वो केवल किताबी कीड़ा बन जाता है|

आप बच्चो को छुट्टियों में होमवर्क ना दे बल्कि उन्हें इस चीज के लिए आजाद कर दे की वो सोचे की उन्हें करना क्या है|

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