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गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर

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gurudev rabindranath tagore

नोबेल पुरुष्कार प्राप्त कवि रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी प्रतिभा से साहित्य, सिक्षा, संगीत, कला, के क्षेत्र में बहुत  योगदान दिए हैं | रबिन्द्रनाथ टैगोर संभावित ही एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं में से दो देशों ने अपने राष्ट्रगान चुने हों |

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म और शुरुआती जीवन

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता, ब्रिटिश इंडिया में हुआ था | बचपन से ही रबीन्द्रनाथ टैगोर अपनी प्रतिभा से लोगों को प्रभावित करने लगे थे | उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी |  और जब वह 16 वर्ष की आयु तक आये तो उनकी पहली लघु कविता प्रकाशित भी हो गयी थी |

रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता का नाम था देवेन्द्रनाथ टैगोर और उनकी माता का नाम था शारदा देवी | जब वे छोटे थे तभी उनकी माताजी चल बसी थी और उनका पालन पोषण नौकर चाकरों ने ही की थी | उनके भाई बहनो को भी कविताओं का बोहत शौक था | रबीन्द्रनाथ टैगोर ने बचपन में कई विद्यालय बदले थे क्योंकि उनको सभी स्कूलों की शिक्षा सुस्त नज़र आती थीं | अंततः केवल 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने पूरी तरह से विद्यालय जाना छोड़ दिए था |

वह बचपन से ही अपने पिता के साथ अलग अलग जगहों का ब्रह्मण करते थे और दोनों एक दुसरे से कविताओं के रूप में जगह की सुंदरता बयां करते | बचपन में भी रबीन्द्रनाथ टैगोर अपनी भाइयों के साथ कई सारे बड़े बड़े कार्य किया करते थे |

रबीन्द्रनाथ टैगोर इंग्लैंड में

सन 1878 में रबीन्द्रनाथ टैगोर अपने बड़े भाई सत्येंद्रनाथ के साथ इंग्लैंड चले गए | लंदन में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने लंदन विश्वविद्यालय में दाखिला लिया | यहाँ उन्होंने अंग्रेजी साहित्य को नज़दीक से सुना और देखा |

लंदन में एक अंग्रेजी परिवार (डॉक्टर सकॉट) के साथ रहकर अंग्रेजी समाज को देखा और जल्द ही वह खुले विचार के लोगों से प्रभावित होने लगे | रबीन्द्रनाथ टैगोर करीब 17 महीने इंग्लैंड में बिताकर फरवरी 1880 में भारत लौट आये |

रबीन्द्रनाथ द्वारा ऐतिहासिक कार्य और साहित्य

सन 1901 में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल में शांति निकेतन की स्थापना की | केवल 5 विद्यार्थियों के साथ रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 22 दिसंबर 1901 को शांति निकेतन में अपने विद्यालय की स्थापना की |

सन 1912 में प्रकाशित हुई उनकी संभवत सबसे प्रख्यात रचना गीतांजलि” ने बहुत नाम कमाया | गीतांजलि के लिए सन 1913 में उनको साहित्य में नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया | गीतांजलि में उनकी पत्नी और उनके बच्चो की मृत्यु का गम बखूभी झलकता है |

सन 1915 में रबीन्द्रनाथ टैगोर को अंग्रेजी सरकार द्वारा नाईटहुड की उपाधि दी गयी | परन्तु सन 1919 में जलियांवाला बाग कांड पर रबीन्द्रनाथ ने नाईटहुड की उपाधि का त्याग कर दिया था |

काबुलीवाला, तीन कन्या, नौकाबन्दी, चतुरंगा, जोगाजोग, घरे बैरे, रबिंद्रसंगीत, अमर शोनार बांग्ला, जन गन मन, जैसे प्रसिद्ध गीत, कविता कहानिया उपन्यास इस देश को दिए |

रबीन्द्रनाथ टैगोर का निजी जीवन

रबीन्द्रनाथ टैगोर का विवाह 22 की उम्र में सन 1883 में भवतारिणी के संग हुआ | विवाह के बाद रबीन्द्रनाथ ने अपनी धर्मपत्नी का नाम भवतारिणी से बदलकर मृणालिनी रख दिया |

मृणालिनी देवी ने 5 बच्चो को जन्म दिया जिनसे से दो बचपन में मर गए थे और केवल 3 ही जीवित रहे | मृणालिनी देवी भी ज्यादा दिन रबीन्द्रनाथ का साथ ना निभा सकी और सन 1902 में भगवान् को प्यारी हो गयीं |

रबीन्द्रनाथ टैगोर का निधन

7 अगस्त 1941 इस महापुरुष ने अपनी आखरी सांस ली और परमात्मा को प्यारे हो गये | उनके द्वारा लिखे गए अंतिम शब्द – ” अपने भीतरी प्रकाश से ओत प्रोत जब वह सत्य खोज लेता है |  कोई उसे वंचित नहीं कर सकता, वह उसे अपने साथ ले जाता है अपने निधि कोष में अपने अंतिम पुरुष्कार के रूप में | “

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