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डेंगू Fever के लक्षण, बचाव और उपचार

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जुलाई से लेकर सितंबर महीने तक जिस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा होता है, वो है डेंगू। मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी डेंगू का अगर वक्त रहते इलाज ना किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है। डेंगू का मच्छर जब किसी भी इंसान को काटता है तो इसका वायरस पूरे शरीर में फैल जाता है। जिसके बाद ये शरीर में प्लेटलेट्स के निर्माण को प्रभावित करता है। शरीर में प्लेटलेट्स की कमी होने की वजह से संक्रमित व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। डेंगू बुखार को ‘बोनब्रेक’ यानी कि ‘हड्डीतोड़’ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें पीड़ित व्यक्ति को इतना ज्यादा दर्द होता है जैसे कि हड्डियां टूट गई हो। डेंगू बुखार हर साल दुनिया भर में 40 करोड़ लोगों को अपनी चपेट में लेता है। पिछले चार दशकों से डेंगू के मरीज भारत में भी बहुत ज्यादा तादाद में देखने को मिल रहे हैं। डेंगू बुखार को तुरंत में पकड़ पाना मुश्किल है। लेकिन इसके कुछ लक्षण हैं जिनमें वक्त रहते समझ लेना चाहिए।

डेंगू बुखार के लक्षण

  • ठंड लगने के बाद तेज बुखार आना
  • मांसपेशियों, सिर और जोड़ों में तेज दर्द
  • शरीर में रैशेज होना
  • उल्टी होना
  • भूख ना लगना
  • जी मिचलाना

डेंगू बुखार के कारण

डेंगू,एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होती है। मच्छर की ये प्रजातियां ज्यादातर दिन के वक्त ही काटती हैं। डेंगू के मच्छर जमा पानी में उत्पन्न होते हैं। इसलिए डेंगू के मौसम में कहा जाता है कि घर के आस- पास पानी को जमा नहीं होने देना चाहिए। इतना ही कई बार डेंगू संक्रमित भोजन और पानी के सेवन से भी होता है। एडीज इजिप्टी मच्छर ठंडे तापमान में भी खुद को जीवित रख सकते हैं और संक्रमण फैला सकते हैं।

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हालांकि डेंगू बुखार छूआछूत बीमारी नहीं हैं, लेकिन ये संक्रमित होता है। यानी कि अगर कोई भी एडीज मच्छर किसी डेंगू के मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खूनचूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जबडेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।

डेंगू बुखार होने पर अगर इलाज की बात की जाए तो जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि ये एक जानलेवा बीमारी है। डेंगू बुखार में समय- समय पर खून की जांच करते रहना जरूरी होता है, इसके जरिए मालूम पड़ता है कि शरीर में प्लेटलेट्स की स्थिति क्या है। इस दौरान मरीज को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन कराना चाहिए। हालांकि डॉक्टर के इलाज के अलावे कुछ घरेलू नुस्खे भी हैं, जो डेंगू बुखार में काफी कारगर साबित होता है। तो आइए जानते हैं कि क्या है वो घरेलू उपचार।

पपीते का पत्ता – यहशरीर में प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही शरीर में दर्द, कमजोरी महसूस होना, उबकाई आना, थकान महसूस होना जैसे बुखार के लक्षण को भी कम करने में सहायक होता है। इसकी पत्तियों को कूट कर खा सकते हैं या फिर इन्हें ड्रिंक की तरह भी पिया जा सकता है।

बकरी का दूध – डेंगू बुखार में बकरी का दूध रामबाण साबित होता है। कहते हैं कि बकरी के दूध में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। ये शरीर में प्लेटलेट्स बढ़ाने में भी काफी कारगर साबित होता है।

गिलोय – गिलोय का आयुर्वेद में बहुत महत्व है। यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है ।

मेथी के पत्ते – यह पत्तियां बुखार कम करने के लिए सहायक हैं। यह पीड़ित का दर्द दूर कर उसे आसानी से नींद में मदद करती हैं। इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर उसके पानी को पीया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

डेंगू से बचाव और इलाज

कहावत है कि ‘किसी भी बीमारी के इलाज से बेहतर होता है उससे बचाव’। ऐसे में डेंगू के इलाज से भी बेहतर है कि समय रहते उससे बचाव कर लिया जाए। डेंगू बुखार ज्यादातर बारिश के वक्त या उसके बाद होते हैं। इसलिए इस मौसम में थोड़ी सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। मच्छर के काटने से बचें। डेंगू के मच्छर स्थिर पानी में ही पनपते हैं, इसलिए अपने आसपास पानी इक्ट्ठा होने ना दें। कूलर या गमले में पानी को भी बदलते रहें।

दूसरी और डेंगू के इलाज की बात करें तोह इसमें मरीज़ को कीवी फल का सेवन कराया जाता है और ज़रुरत पड़ने पर प्लेटलेट्स भी चढ़ाये जाते हैं |

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