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बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियाँ

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barish ke mausam mai hone wali bimariyan

बरसात के मौसम में बालकनी में बैठकर गर्मागर्म चाए पकोड़े खाने का तो मज़ा ही अलग है | किसानों के लिए तो बरसात मानो जैसे भगवान बन के आती है | इस हसीं मौसम का लुत्फ़ सभी उठाते हैं और सभी के स्कूल कॉलेजेस के बरसात के अपने अपने किस्से होते हैं |

बरसात का मौसम जितना सुहाना है उतना ही खतरनाक भी | सभी मौसमों की तुलना में बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा मरीज़ अस्पतालों में भर्ती किये जाते हैं | तो आज हम बात करेंगे बरसात के मौसम में होनी वाली बीमारीयों की और किस तरह आप उन बीमारीयों से बच सकते हैं और साथ ही बरसात के मौसम का पूरा लुत्फ़ उठा सकते हैं |

मलेरिया (Malaria)

बरसात में सबसे अधिक पाए जाने वाली बीमारीयों में से एक है मलेरिया | मलेरिया का बुखार कई तरह के मच्छरों के काटने से हो सकता है | यह मच्छर गंदे पानी में प्रजनन करते हैं | और बरसात के मौसम  में अक्सर सीवर का पानी बाहर आ जाता है, कई बार नालियां बंद हो जाती हैं | घरों के बाहर पानी जमा हो जाता है |

मलेरिया में बुखार, सरदर्द, बदन दर्द जैसे लक्षण पाए जाते हैं | और मलेरिया अगर शरीर में ज्यादा दिन ठहर जाये तो घातक साबित हो सकता है |

मलेरिया से बचाव के तरीके:-

अपने घर में या घर के आसपास पानी जमा न होने दें | घर के आसपास साफ़ सफाई रखें | घर के अंदर मच्छरों से बचाव का प्रबंध रखें और अगर आप खुले में सोते हैं तो मच्छरदानी का प्रयोग करें | साथ ही अगर आप मजबूरन किसी ऐसे इलाके में रह रहे हैं जहाँ मलेरिया का खतरा अधिक है तो एंटी-मलेरियल दवाई लेके रखें |

कोल्ड और फ्लू (Cold and Flu)

बरसात के मौसम में तापमान ऊपर नीचे होता रहता है ऐसे में शरीर की सहनशीलता घट जाती है और सर्दी ज़ुखाम के कीटाणु शरीर में जगह बना लेते हैं | ऐसे में शरीर कई बार फ्लू का भी शिकार होजाता है |

आम सर्दी और फ्लू के लक्षण काफी हद तक एक समान होते हैं जैसे की गले में दर्द, सिर में दर्द, सांस लेने में परेशानी, जोड़ों में दर्द आदि |

सर्दी और फ्लू से बचने के तरीके –

इनसे बचने के लिए ज़रूरी है आप बाहर का खाना बिलकुल ही बंद करदें और घर में भी पर्याप्त आहार का भोजन ग्रहण करें | हरी सब्जियां, दाल, नींबू, फलों का सेवन पर्याप्त मात्रा में रखें | इससे आपके शरीर की सहनशीलता बढ़ेगी और वह बाहरी वायरस से लड़ पायेगा |

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हैज़ा (Cholera)

बैक्टीरिया से होने वाली एक और घातक बीमारी है ‘हैज़ा’ | कुछ दशक पहले हैज़ा से बहुत मौतें हुआ करती थीं | यह बीमारी दूषित पानी पीने और दूषित खाना खाने से हो सकती है | हैज़ा के दौरान शरीर में पानी की कमी बहुत भारी मात्रा में हो जाती है | अगर समय पर इलाज न हो तो यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है |

हैज़ा से बचने के तरीके –

अगर आप हैज़ा से बचे रहना चाहते हैं तो अपने शरीर को परयप्त मात्रा में हाइड्रेट रखें अर्थात शरीर में पानी की मात्रा पर्याप्त रखें | और केवल स्वस्थ भोजन और स्वस्थ खाने का ही सेवन करें |

टाइफाइड (Typhoid)

टाइफाइड एक ऐसी बीमारी है जो एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक बहुत जल्दी फैलती है | हालांकि वायरस या बैक्टीरिया से फैलने वाली अधिकांश बीमारियां एक से दुसरे शरीर में जल्द ही घर बना लेती हैं | परन्तु टाइफाइड इस सूची में काफी ऊपर है | टाइफाइड भी दूषित पानी अथवा दूषित खाना खाने से हो सकता है | टाइफाइड के लक्षण है लगातार कई दिनों तक बुखार, कमर में दर्द, सिर दर्द, उल्टी आदि |

टाइफाइड से बचने के तरीके –

टाइफाइड से बचे रहने क लिए आपको साफ़ सफाई का अधिक ध्यान रखना होगा और खान पान पूर्ण तरीके से स्वस्थ रखना होगा | साथ ही खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद हाथ धोना न भूलें |

डेंगू (Dengue)

पिछले कई सालों में दिल्ली एनसीआर के इलाके में डेंगू से कई मौतें हो चुकी हैं | और न केवल दिल्ली एनसीआर ही परन्तु डेंगू से पूरा भारत ही ग्रस्त हो जाता है | डेंगू का मच्छर साफ़ पानी में पैदा होता है और वह एक वायरस फैलाता है जिससे डेंगू बनता है |

डेंगू के लक्षणों में शामिल है बुखार, जोड़ों में दर्द, हड्डियों में दर्द, शरीर में दर्द, सिर दर्द, थकावट, सिर| डेंगू के इलाज के लिए एंटीबॉयटिक या एंटीवायरस अभी तक नहीं बनी है |

डेंगू से बचाव के तरीके

चूँकि डेंगू मच्छरों से फैलता है तो आपको मच्छरों से बचाव रखना होगा | पुरे बाज़ू की कमीज, मच्छर भगाने की दवाई, क्रीम जैसी चीज़ो का प्रयोग करना होगा | इसके अलावा डेंगू का मच्छर साफ़ पानी में प्रजनन करता है और दिन में ही काटता है |

किसी भी तरह के बुखार को नज़रअंदाज़ बिलकुल भी न करें | और तुरंत ही किसी भी  नजदीकी डॉक्टर के पास जाकर दिखायें और अपना चेकअप कराएं और अपने आप को बीमारीयों से दूर रखें.

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