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Baba Saheb Dr Bhimrao Ambedkar

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Baba-Saheb Dr Bheem Rao Ambedkar

सन 1897, महाराष्ट्र राज्य की कोंकण जिले के एक छोटे से गांव दापोली में 6 साल के भीमराव का स्कूल का पहला दिन था | वह स्कूल जाने के लिए बहुत उत्सुक था, वह खुशी से स्कूल पहुंचा और बाकी बच्चों के साथ कक्षा में बैठ गया |

“भीमराव तुम एक महार हो, तुम कक्षा में बाकी बच्चों के साथ नहीं बैठ सकते क्योंकि वह ऊंची जाति के हैं” तेज आवाज में कक्षा में आए अध्यापक ने कहा | अध्यापक ने भीमराव को कक्षा से बाहर जाने के लिए कहा और कक्षा के बाहर बैठकर ही पढ़ाई पर गौर करने को कहा |

यह पहला अवसर था जब भीम राव को भारतीय जाति व्यवस्था के बारे में पता चला | उसे पता चला कि ब्राह्मण भारत में सबसे ऊंची जाति के हैं, उसके बाद क्षत्रिय, वैश्य और, अंत में शूद्र जो कि वह खुद था |

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर  का शुरुआती जीवन

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में इंदौर मध्य प्रदेश में हुआ | भीमराव का असली नाम भीमराव अंबावादे जो आगे चलकर एक अध्यापक ने भीमराव अंबेडकर कर दिया |  वह अपने माता पिता का चौदहवां  बालक था | भीमराव के पिता रामजी आर्मी में सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत थे | भीमराव के दादा जी मनोज जी सतपाल भी भारतीय आर्मी में ही थे | भीमराव अंबेडकर की माता का नाम भीमाबाई था |

भीमराव के शुरुआती दिनों में उसके लिए स्कूल जाना बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा था | भीमराव के बचपन में ही उसके साथ अछूत का व्यवहार होता था | यहां तक कि विद्यालय में वह मटके से पानी भी नहीं पी सकता | पानी पीने के लिए भी कोई ऊंची जाति का बच्चा या अध्यापक गिलास में पानी भरकर उसके हाथों की बनी ओक मैं डालता था | जल्द ही भीमराव की समझ में आ गया कि यह व्यवहार केवल उसके साथ नहीं है परंतु सभी नीची जाति के बच्चों के साथ यह दुर्व्यवहार किया जाता है और उन्हें अछूत माना जाता है |

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की पढ़ाई

प्राइमरी क्लास में ही भीमराव अंबेडकर ने अध्यापकों को अपनी बुद्धि और अपने कार्य से प्रसन्न कर दिया था | जैसे-जैसे भीमराव बड़ा होता गया वैसे-वैसे उसका संबंध अध्यापकों से मजबूत होता गया | भीमराव के एक अध्यापक ने लंच के वक्त एक बार भीमराव से साथ खाने की गुजारिश की | भीमराव किसी उच्च जाति के इंसान से ऐसी उदारता देख कर बहुत प्रसन्न हुआ और उस दिन से भीमराव अपने उस अध्यापक के साथ रोज लंच करने लगा | भीमराव की कुशलता देखकर एक अध्यापक ने एक दिन भीमराव को अपना नाम देकर भीमराव अंबेडकर कहना शुरू कर दिया, और तब से ही भीमराव अंबावादी भीमराव अंबेडकर बन गए |

भीमराव ने अपने शुरुआती पढ़ाई पूरी कर सन 1904 में एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया जो कि मुंबई में था | इसी साल भीमराव का पूरा परिवार सतारा से मुंबई शिफ्ट हुआ था | भीमराव का बचपन से ही किताबों से बहुत लगाव था वहां छोड़ सकते थे परंतु है किताबों को नहीं छोड़ सकते |

भीमराव की आगे की जिंदगी

भीमराव अंबेडकर ने स्नातक की डिग्री 1912 में प्राप्त की | वह अपनी बिरादरी का यह करने वाले पहले इंसान थे | ग्रेजुएशन करने के बाद जल्द ही भीमराव को एक सरकारी नौकरी प्राप्त हुई | भीमराव अपने पिता का ख्याल रख सकते थे| भीमराव के नौकरी लगने के कुछ दिन बाद ही भीमराव के पिता चल बसे |

पढ़ाई के बाद नौकरी का एग्रीमेंट कर कर स्कॉलरशिप की सहायता से भीमराव जुलाई 1913 में न्यू यॉर्क चले गए | भीमराव को बहुत खुशी हुई कि वहां पर अछूत जैसा कुछ नहीं था, सभी को समान नजरों से देखा जा रहा था | सन 1916 में भीमराव ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की | इसी साल भीमराव न्यूयॉर्क से लंदन चले गए | परंतु आर्थिक तंगी के चलते उन्हें भारत लौटना पड़ा | सन 1917 में भीमराव अंबेडकर ने अपनी नौकरी को दोबारा ज्वाइन किया |

सन 1918 में भीमराव अंबेडकर को सिडेनहैम कॉलेज, मुंबई में लेक्चरर के पद पर नौकरी प्राप्त हुई | भीमराव इतने अच्छे वक्ता थे कि दूसरे कॉलेजों से भी बच्चे उनका लेक्चर सुनने आया करते थे | सन 1920 में यह नौकरी छोड़कर भीमराव कानून और राजनीति पढ़ने लंदन चले गए | सन 1923 में वह अर्थशास्त्र और बैरिस्टर की डिग्री के साथ भारत लौटे |

Bheem Rao Ambedkar, डॉ भीमराव अंबेडकर

डॉ भीमराव अंबेडकर की समानता के लिए लड़ाई

डॉ भीमराव अंबेडकर अछूत के खिलाफ लंबे समय तक लड़ते रहे | वह अमेरिका के सेक्शन 14 से बहुत प्रभावित थे जिसमें अश्वेत लोगों के लिए भेदभाव खत्म कर दिया गया था | सन 1923 मैं भारत सरकार ने विद्यालय अस्पताल कोर्ट पब्लिक स्कूल में दाखिले के लिए नीची जातियों की मनाही कर दी थी |

डॉ भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में करीब 15000 आदमी और 500 औरतें सन 1930 में कालाराम मंदिर नासिक पहुंचे | वहां पर उन्होंने अपने हक के लिए सत्याग्रह शुरू किया |

इसी दौरान सन 1930 लंदन में, राउंड टेबल कांफ्रेंस के दौरान, भीमराव अंबेडकर ने भारत की जातिवादी हालत को पेश किया और अपने हक के लिए गुहार लगाई | सन 1931 में भीमराव अंबेडकर की सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के दौरान बहुत पूछ रही थी |

अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान

आज जो भारत का संविधान है उसमें भीमराव अंबेडकर का बहुत बड़ा योगदान था | सन 1936 में भीमराव अंबेडकर ने स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की | सन 1942 में भीमराव अंबेडकर ने ऑल इंडिया शेडूल कास्ट फेडरेशन को शुरू किया |

सन 1947 में जब भारत आजाद हो गया तो भीमराव अंबेडकर आजाद भारत के पहले कानून मंत्री बने | इसके अलावा संविधान बनाने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन भीमराव अंबेडकर ही थे | भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था |

27 सितंबर 1951 डॉ भीमराव अंबेडकर ने केबिनेट मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था | उन्होंने कोई लिखित पत्र नहीं दिया था वह जवाहरलाल नेहरू से नोकझोंक के कारण सीधा ही संसद से बाहर चले गए |

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की निजी जिंदगी

भीमराव अंबेडकर ने अपनी जिंदगी में दो विवाह किए थे | उनका पहला विवाह सन 1906 में हुआ था, उनकी पहली पत्नी का नाम था रमाबाई | रमाबाई का देहांत सन 1935 में बीमारी के कारण हो गया था |

भीमराव अंबेडकर ने अपना दूसरा विवाह 15 अप्रैल 1948 को सविता कौर के साथ किया था | भारत आजाद होने के बाद भीमराव अंबेडकर थोड़ा बीमार रहने लगे थे तभी से उनकी देखभाल के लिए सविता जो कि एक डॉक्टर थी, उनके पास रहने लगी थी | सविता अंबेडकर का देहांत 94 साल की उम्र में 2003 में हुआ |

अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों में भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया था | 4 दिसंबर 1956 को उन्होंने अपनी किताब बुद्धा एंड कार्ल मार्क्स का अंतिम चैप्टर लिखा और उसे प्रकाशित होने के लिए दे दिया |

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का देहांत

भीमराव अंबेडकर का देहांत बीमारी के चलते 6 दिसंबर 1956 को हुआ | भारत के लोगों के लिए, खास तौर पर नीची जाति के लोगों को समान अधिकार दिलाने के लिए भीमराव अंबेडकर एक देवता बनकर आए थे | उनके इसी कार्य के लिए सन 1990 में उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया | 14 अप्रैल को भीमराव अंबेडकर जयंती के रूप में पूरे भारत में अवकाश रहता है |

 

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