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क्रांति दिवस 10 May 1857

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10 May 1857 Revolution

1857 की क्रांति, एक ऐतिहासिक विद्रोह था जिसे अंग्रेजो के खिलाफ पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है | 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुई यह क्रांति धीरे-धीरे पूरे उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में फैल गई थी | इस दिन को और ऐतिहासिक बनाने के लिए इस साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 मई को क्रांति दिवस के रूप में मनाएंगे |

योगी सरकार की तैयारी

योगी सरकार ने यह तय किया है कि 10 मई को बड़े पैमाने पर क्रांति दिवस मनाया जाएगा | चूँकि 1857 विद्रोह की शुरुआत मेरठ से हुई से इसीलिए योगी आदित्यनाथ भी क्रांति दिवस का आयोजन मेरठ में ही करेंगे |

दरअसल हाल ही में हुए मेयर चुनावों में भाजपा सरकार मेरठ और अलीगढ़ में चुनाव हार गई थी इसी के चलते उन इलाकों में अपना दबदबा बनाने के लिए यह भव्य कार्य करे जा रहे हैं | गौरतलब है कि 2019 के प्रधानमंत्री चुनावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है |

इस ऐतिहासिक दिन को इस साल बहुत खास बना दिया जाएगा और ना केवल 1857 के विद्रोहियों को याद किया जाएगा परंतु युवा पीढ़ी को देश की आजादी की संघर्ष गाथा को बेहतर ढंग से पेश कर उन्हें देश प्रेम और देश भक्ति के लिए प्रेरित किया जाएगा | 10 मई को मेरठ के सभी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे 1 दिन का अवकाश रहेगा |

1857 की क्रांति – प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बड़े पैमाने पर भारत द्वारा किया जाने वाला पहला विद्रोह जिसने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था | यह विद्रोह करीब 2 साल तक चला था, हालांकि इसमें भारत की पूर्ण रुप से हार हुई थी परंतु इस विद्रोह ने आम जनता के दिलों में आजादी की लहर दौड़ा दी थी |

10 May 1857 Kranti

1857 के विद्रोह का कारण कई चीजों को माना जाता है जिसमें धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक, इनफील्ड बंदूक सबसे महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं |

मंगल पांडे की कुर्बानी को कौन भूल सकता है | इनफील्ड बंदूक के कारतूस में लगी चर्बी सूअर और गाय के मांस से बनी हुई थी | यह हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्म के खिलाफ था | और जब भारतीय सिपाहियों को यह पता चला तो उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया | इसी के चलते 6 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे का कोर्ट मार्शल कर दिया गया और 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई | यह कुर्बानी व्यर्थ ना थी इस कुर्बानी ने 1857 के क्रांति   की आग को और भड़का दिया था |

दिल्ली-मेरठ बरेली लखनऊ में भी सिपाहियों का हाल ठीक ना था | और यह क्रांति अलग-अलग प्रांतों से शुरू हो कर एक विक्राल क्रांति बन गई थी जिसे आज इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में देखा जाता है |

अंत में भारत की तो हार हुई परंतु भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन की समाप्ति के साथ पूरे भारत पर ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष शासन आरंभ हो गया जो अगले 90 वर्षों तक चला | कहा जाता है की भारत की आज़ादी में सन 1857 की लड़ाई ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था |

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