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भारतीय सिनेमा (Indian Cinema)

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विश्व के चलचित्र जगत पर भारतीय सिनेमा ने 20वीं सदी के शुरूआत से ही गहरा प्रभाव छोड़ा है एवं भारत की जनता के विभिन्न वर्गों में एक माध्यम के रूप में लोकप्रिय हुआ। जिनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु एवं पश्चिम बंगाल बाॅलीवुड शामिल है। भारतीय फिल्मों का अनुकरण पूरे दक्षिणी एशिया, ग्रेटर मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्व सोवियत संघ में भी होता है।

भारतीय सिनेमा के जनक दादा साहेब फाल्के के शताब्दी वर्ष 1969 में भारत सरकार द्वारा ‘‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’’ की स्थापना की गयी। जिसे भारतीय सिनेमा का प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है। इस पुरस्कार की शुरूआत दादा साहेब फाल्के के भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के प्रतीक के तौर पर की गयी।

पहली बोलती फिल्म

पहली भारतीय बोलती फिल्म आलम आरा (Alam Ara) 14 मार्च 1931 को आर्देशिर ईरानी ने रिलीज की। भारतीय फिल्म में कई फिल्म स्टारों की मांग ‘टाॅकीज’ के भारत आगमन के बाद बहुत ज्यादा बढ़ गयी और वह अभिनय के दम पर अच्छी आमदनी करने लगे। भारत के पाॅल मुनि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले चित्तौर वी. नागया, पहले बहुभाषी फिल्म अभिनेता, गायक, संगीतकार, निर्माता और निर्देशक थे।

रोमांस, नाच, गाने वाली व्यावसायिक फिल्म के लिए कठबोली शब्द का उद्भव दुसरे विश्व युद्ध के बाद हुआ। भारतीय सिनेमा को सांस्कृतिक पुनर्निमाण के साधन के रूप में 1940 के दशक के समय से देखा जाने लगा।

भारतीय सिनेमा (बॉलीवुड) का स्वर्णिम युग :

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद फिल्म इतिहासकारों द्वारा 1944 से 1960 के समय को भारतीय सिनेमा का स्वर्ण युग कहा जाता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास की समीक्षकों द्वारा सर्वाधिक प्रशंसित फिल्में इसी समय निर्मित हुई थी। जैसे – राज कपूर की आवारा (1951) और श्री 420 (1955), गुरू दत्त की प्यासा (1957) और कागज के फूल (1959) ये फिल्में उस दौर के शहरी कामकाजी वर्ग की जिन्दगी एवं सामाजिक विषय को दर्शाती थी। महबूब खान की मदर इंडिया (1957) जैसी प्रसिद्ध फिल्में भी इस दौरान निर्मित हुई जिसे विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अकादमी पुरस्कार का नामांकन भी मिला, के. आसिफ की मुगलआजम (1960) जैसी प्रसिद्ध फिल्म भी इसी समय बनी।

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अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार पाने वाले प्रथम भारतीय अभिनेता :

1960 के एफ्रो एशियाई फिल्म समारोह में “सिवाजी गणेशन” ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब जीता और वे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय अभिनेता बने। 1995 में फ्रेंच सरकार ने उन्हें लीजन ऑफ़ ऑनर में शेवएिर का सम्मान दिया।

ऑस्कर मे बॉलीवुड :

अमेरिकन अकादमी अवार्ड में भी भारतीय सिनेमा को पहचान मिली है डैनी बॉयल की 2008 में बनी स्लम डॉग मिलियनेयर फिल्म अकादमी अवार्ड जीता। कुछ और भारतीय फिल्में भी सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के अकादमी अवार्ड के लिए नामांकित हुई जैसे मदर इंडिया (1957), सलाम बॉम्बे (1988) और लगान (2001) हैं। अकादमी अवार्ड जीतने वाले भारतीय फिल्मकार सत्यजित राय, गीतकार गुलजार, संगीतकार . आर. रहमान, पोशाक डिजाइनर भानु अथैया और ध्वनि संपादक रेसुल पूकुट्टी हैं।

भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय कलाकार :

आधुनिक भारतीय सिनेमा में कमल हसन मसहूर भारतीय अभिनेता हैं जिन्हें 4 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 3 बार अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला। बिग बी के नाम से मशहूर अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के सबसे सफलतम अभिनेताओं में गिने जाते हैं एवं, राज कपूर , दिलीप कुमार, मनोज कुमार, धर्मेंद्र, जीतेन्द्र, शम्मी कपूर, मधुबाला, नरगिस, सुनील दत्त, शायरा बानो, रेखा, हेमा मालिनी, जीनत अमान,  रजनीकांत, माधुरी दीक्षित, श्री देवी, सलमान खान, शाहरुख़ खान, आमिर खान, अक्षय कुमार,  ऐश्वर्या राय बच्चन बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय कलाकार हैं।

 

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